वर्ष (Vol.) - 5, अंक (Issue) - 10
अनुक्रमणिका
गांधीजी का जंतर
बिहारी की काव्य-कला
किरण कुमारी – पृ. 05–16
रीतिकाल के अग्रदूत: महाकवि केशवदास
डॉ. अंजु – पृ. 17–19
Echoes from the Past: Exploring Tripuri Identity through Kokborok Folk Narratives
Barna Rani Jamatia – पृ. 20–25
स्तोत्र साहित्य की महनीयता
डॉ. निमिषा त्रिपाठी – पृ. 26–29
ओमप्रकाश वाल्मीकि की नजर में दलित साहित्य की धार्मिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक मान्यताएँ
प्रतिभा भारद्वाज – पृ. 30–35
सूचना का अधिकार अधिनियम – 2005: एक अवलोकन
दीपक कुमार कोठरीवाल – पृ. 36–40
प्रगतिशील विचारधारा और नागार्जुन का मिथिलांचल
प्राची सिंह – पृ. 41–47
भक्ति काव्य का सामाजिक-सांस्कृतिक प्रदेय
डॉ. जयन्त कुमार कश्यप – पृ. 48–52
साम्प्रदायिक राजनीति और भारत-विभाजन
डॉ. मो. बदरूद्दीन अंसारी – पृ. 53–60
राष्ट्र प्रेम की अभिव्यंजना: दिनकर कृत ‘किसको नमन करूँ मैं’
डॉ. नियति कल्प – पृ. 61–65
विभिन्न दर्शनों में शब्दार्थ सम्बन्धी मीमांसा
डॉ. इन्द्रजीत प्रसाद सिंह – पृ. 66–73
जीवन मूल्य के विभिन्न आयाम
डॉ. खिरोधर प्रसाद यादव – पृ. 74–77
भैरव के पूर्वांग स्वर-समूहों से निर्मित रागों की विशेषता
डॉ. नुतन कुमारी – पृ. 78–84
मुगल कालीन आर्थिक व्यवस्था: एक परिचय
डॉ. जय कुमार साह – पृ. 85–89
Dimensions of Sulh-i-Kul and the Religious Thoughts of Akbar
Kamal Shivkant Hari – पृ. 90–102
विशेष पिछड़ी जनजाति ‘पहाड़ी कोरवा’ की सामाजिक संस्कार एवं परिवर्तनों का मानवशास्त्रीय अध्ययन
कृष्ण कुमार पैकरा – पृ. 103–107
‘जो इतिहास में नहीं है’ में आदिवासी-शोषण की अभिव्यक्ति
डॉ. रमीष एन. – पृ. 108–110
मनोविकारों का उन्मूलन और सृष्टि कल्याण
सतीन्द्र कुमार शुक्ल – पृ. 111–116
नागार्जुन के ‘निराला’: एक व्यक्ति, एक युग
डॉ. विनोद कुमार मिश्र – पृ. 117–124
झारखंड के आदिवासी: जीवन और समाज
डॉ. अभिषेक कुमार यादव – पृ. 125–130