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पदचिन्ह (दिसंबर, 2016)

वर्ष (Vol.) - 5, अंक (Issue) - 10

अनुक्रमणिका

गांधीजी का जंतर

  1. बिहारी की काव्य-कला
    किरण कुमारी – पृ. 05–16

  2. रीतिकाल के अग्रदूत: महाकवि केशवदास
    डॉ. अंजु – पृ. 17–19

  3. Echoes from the Past: Exploring Tripuri Identity through Kokborok Folk Narratives
    Barna Rani Jamatia – पृ. 20–25

  4. स्तोत्र साहित्य की महनीयता
    डॉ. निमिषा त्रिपाठी – पृ. 26–29

  5. ओमप्रकाश वाल्मीकि की नजर में दलित साहित्य की धार्मिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक मान्यताएँ
    प्रतिभा भारद्वाज – पृ. 30–35

  6. सूचना का अधिकार अधिनियम – 2005: एक अवलोकन
    दीपक कुमार कोठरीवाल – पृ. 36–40

  7. प्रगतिशील विचारधारा और नागार्जुन का मिथिलांचल
    प्राची सिंह – पृ. 41–47

  8. भक्ति काव्य का सामाजिक-सांस्कृतिक प्रदेय
    डॉ. जयन्त कुमार कश्यप – पृ. 48–52

  9. साम्प्रदायिक राजनीति और भारत-विभाजन
    डॉ. मो. बदरूद्दीन अंसारी – पृ. 53–60

  10. राष्ट्र प्रेम की अभिव्यंजना: दिनकर कृत ‘किसको नमन करूँ मैं’
    डॉ. नियति कल्प – पृ. 61–65

  11. विभिन्न दर्शनों में शब्दार्थ सम्बन्धी मीमांसा
    डॉ. इन्द्रजीत प्रसाद सिंह – पृ. 66–73

  12. जीवन मूल्य के विभिन्न आयाम
    डॉ. खिरोधर प्रसाद यादव – पृ. 74–77

  13. भैरव के पूर्वांग स्वर-समूहों से निर्मित रागों की विशेषता
    डॉ. नुतन कुमारी – पृ. 78–84

  14. मुगल कालीन आर्थिक व्यवस्था: एक परिचय
    डॉ. जय कुमार साह – पृ. 85–89

  15. Dimensions of Sulh-i-Kul and the Religious Thoughts of Akbar
    Kamal Shivkant Hari – पृ. 90–102

  16. विशेष पिछड़ी जनजाति ‘पहाड़ी कोरवा’ की सामाजिक संस्कार एवं परिवर्तनों का मानवशास्त्रीय अध्ययन
    कृष्ण कुमार पैकरा – पृ. 103–107

  17. ‘जो इतिहास में नहीं है’ में आदिवासी-शोषण की अभिव्यक्ति
    डॉ. रमीष एन. – पृ. 108–110

  18. मनोविकारों का उन्मूलन और सृष्टि कल्याण
    सतीन्द्र कुमार शुक्ल – पृ. 111–116

  19. नागार्जुन के ‘निराला’: एक व्यक्ति, एक युग
    डॉ. विनोद कुमार मिश्र – पृ. 117–124

  20. झारखंड के आदिवासी: जीवन और समाज
    डॉ. अभिषेक कुमार यादव – पृ. 125–130