वर्ष (Vol.) - 9, अंक (Issue) -1
अनुक्रमणिका
भारत का संविधान: उद्देशिका
विस्थापन की त्रासदी तले आदिवासी समाज : एक विमर्श
सपना दुबे – पृ. 05–09
आदिवासी विस्थापन के विभिन्न कारक
जीवेश कुमार झा – पृ. 10–13
चित्रा मुद्गल की रचनाओं में नारी
प्रिया सिंह – पृ. 14–17
हिंदी में अपभ्रंश भाषा का उदय और विकास
डॉ. मंजु लाल – पृ. 18–22
Secularism in Indian Cinema: An Analysis of Bollywood Movies
Subodh Chandra Bharti, Dr. Bharti Devi – पृ. 23–41
दक्षिण का हिंदी सेतु: डॉ. बालशौरि रेड्डी
डॉ. एच. ए. हुनगुंद – पृ. 42–47
दलित महिला सशक्तिकरण एवं संवैधानिक प्रावधान
श्रीलेखा कुमारी – पृ. 48–55
गांधी और उनका प्राकृतिक लोक चिकित्सा
महेंद्र कुमार जायसवाल – पृ. 56–60
पत्र का साहित्य की अन्य विधाओं से संबंध
डॉ. जसवीर त्यागी – पृ. 61–69
महादेवी वर्मा के काव्य में प्रकृति वर्णन
डॉ. किरण कुमारी – पृ. 70–74
स्मृति के कवि केदारनाथ सिंह
प्रिया – पृ. 75–78
‘आभासी जगत’ में ग्रामीण किशोर
सूरज पाण्डेय – पृ. 79–86
चिकित्सकीय अपकृत्य विधियों पर समीक्षात्मक अध्ययन
कल्याणी – पृ. 87–93
त्रिलोचन की कविता में जनजीवन की अभिव्यक्ति
सुनील यादव, डॉ. सुरेन्द्र प्रताप सिंह यादव – पृ. 94–98
नाट्य कला के संदर्भ में निर्देशक एवं निर्देशन कला
विवेक कुमार, डॉ. गोविन्दराजू भारद्वाज – पृ. 99–108
मिथकीय नाटक: स्त्री अभिव्यक्ति और सामाजिक प्रभाव
आशा – पृ. 109–114
राष्ट्र और मीडिया
संजीव कुमार – पृ. 115–121
फणीश्वरनाथ रेणु के साहित्य में जातीय यथार्थ
कोमल वर्मा – पृ. 122–127
कहानीकार मिथिलेश्वर और उनकी कहानी 'हरिहर काका'
अखिलेश यादव – पृ. 128–135
गिरिधर कविराय की काव्यभाषा
डॉ. मुकेश कुमार – पृ. 136–145
भारत में बाल मजदूरी की दशा एवं दिशा
डॉ. अभिषेक त्रिपाठी – पृ. 146–154
प्रवाल भित्ति का संरक्षण
दिव्या लक्ष्मी – पृ. 155–158
पत्रकार निराला एवं ग्रामीण मीडिया में महिलाओं की भूमिका
विष्णु कु. मिश्र – पृ. 159–166
खड़िया और उरांव जनजाति की तुलनात्मक विवाह व्यवस्था
रीबा वाणी तिर्की – पृ. 167–174